हमसफर

शुक्रवार, 2 सितंबर 2011

लेखक भाषा का आदिवासी है, लेकिन उदय प्रकाश जी आप ?

(उदय प्रकाश के ब्लाग पर 22 जुलाई के पोस्ट "लेखक भाषा का आदिवासी है" को पढ़कर लिखा गया। दरअसल यह साहित्य अकादमी पुरस्कार के लिए स्वीकार वक्तव्य था। यह पोस्ट उनके ब्लाग पर 24 अगस्त को किया था।)
पहले तो यह कह दूं कि मैं जिस उदय प्रकाश को जानता हूं वह अबूतर-कबूतर से शुरू होता है, जबकि इससे पहले कविता ‘सुनो कारीगर’ से काफी चर्चित हो चुके थे। और उसके बाद तो तिरिछ, और अंत में प्रार्थना, मोहनदास, मेंगोसिल, वारेन हेस्टिंग्स का सांड़ और भी न जाने कहां-कहां किन-किन गलियों और राजमार्ग होते हुए हमारे उदय प्रकाश का सृजन हुआ। हम जिस उदय प्रकाश को जानते हैं वह किसी भी साहित्य अकादमी से ऊपर है। उदय प्रकाश जी आप तो खुद हिंदुस्तान दैनिक के साथ एक साक्षात्कार में कह चुके हैं- आप कैमरा जहां रखते हैं, वहीं से उसका फ्रेम तैयार हो जाता है। तो फिर उस राज्य सत्ता के लिए प्रशंसा के शब्द कैसे निकले जिस राज्यसत्ता को आप भी आततायी मानते हैं। प्रतिबद्धता सिर्फ रचनाओं से ही नहीं दीखाने की चीज नहीं, जीने की चीज है। आखिर अशोक वाजपेयी ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दिया जानेवाला सम्मान ठुकराया तो ? यह अलग बहस का विषय हो सकता है कि उन्होंने अपने इस कदम से क्या खारिज किया है और किसे आवाज दी है। पर इतना तो है ही कि संस्कृतिकर्मी अपनी स्वायत्तता खुद ही सिरजता है। ऐसे में व्यावहारिक तौर पर प्रतिबद्धता दीखाने के मौके गंवाना हमारी विचारधारा को ही व्यक्त्त करता है। आपने खुद ही ‘मोहन दास’ को दिए गए सम्मान के लिए अपने वक्तव्य में कहा है - कोई भी पुरस्कार किसी भाषा और भूमि में किसी मनुष्य का पुनर्वास तो नहीं कर सकता। क्या इस मौके पर औपचारिक वक्तव्य देने के लिए आपकी असमंज और दुविधा का हिस्सा यह भी तो रहा होगा। राज्यसत्ता से नाखुश संस्कृतिकर्मी इससे संरक्षण की अपेक्षा जैसे ही पालता है, वैसे ही संस्कृति की स्वायत्तता का खंडन करता है। गाली भी दें और कहें शाल भी ओढ़ाओ। यह कैसे हो सकता है। इस शासन का यह व्यवहार अचरज का विषय नहीं। आखिर प्रतिरोधी चेतना शासन से सम्मानित भी तो नहीं होगी। चोर से सम्मानित होना कहीं न कहीं चोरी को मंजूरी देने के बराबर ही है। मैं कवि नहीं हूं। इधर कथादेश के जून (2011) अंक में मेरी कुछ कविताएं है। उनमें से एक कविता ‘यह वक्त’ देखना बड़ा मौजूं होगा।

कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें